नवम्बर में अगर इस्राईल में आम चुनावों का आयोजन होता है, तो यह दो साल से भी कम मुद्दत में चौथा आम चुनाव होगा।
इससे पहले राजनीतिक गतिरोध के चलते इस्राईल में अप्रैल और सितम्बर 2019 में और उसके बाद तीसरी बार इसी साल मार्च में आम चुनावों का आयोजन किया गया था।
हालांकि तीसरी बार भी किसी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिल सका और नेतनयाहू ने अपने धुर विरोधी बेनी गेंट्ज़ के सहयोग से सरकार का गठन किया।
नेतनयाहू के निकट सूत्रों का कहना है कि उन्होंने 2020 के लिए बजट पारित नहीं करने का फ़ैसला किया है, क्योंकि उनकी नज़र 18 नवम्बर को आम चुनाव के आयोजन पर है।
नेतनयाहू भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं और इस्राईल में लोग कोरोना महामारी से निपटने में उनकी सरकार की असफलता को लेकर सड़कों पर हैं।
तेल-अवीव और बैतुल मुक़द्दस में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकल रहे हैं और आर्थिक संकट के चलते नेतनयाहू से इस्तीफ़ा देने की मांग कर रहे हैं।
इस्राईली अख़बार हारेट्ज़ का कहना है कि अगर कोरोना वायरस महामारी के कारण, नेतनयाहू नवम्बर में चुनाव के आयोजन में नाकाम रहते हैं तो वह अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में काम करेंगे।
बेनी गेंट्ड़ की पार्टी ब्लू एंड व्हाइट के नेताओं ने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है, जबकि वह नेतनयाहू सरकार का हिस्सा है।
हालांकि इस्राईली राष्ट्रपति रुविन रिवलिन एक के बाद एक चुनावों के आयोजन की ख़बरों से भड़क गए हैं और उन्होंने कहा है कि चुनावों के बारे में अब कोई बात नहीं होनी चाहिए।
ज़ायोनी राष्ट्रपति का कहना थाः चुनाव के बारे में बात करना बंद करें। ऐसे समय में इस डरावने विकल्प की बात न करें। आपने इस्राईल को एक कठपुतली समझ लिया, जिसे आप अपने पीछे पीछे खींच रहे हैं।
मंगलवार की रात बैतुल मुक़द्दस (यरूशलम) में इस्राईली पुलिस ने नेतनयाहू के घर के सामने धरना देने वाले 34 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया था।
नेतनयाहू के ख़िलाफ़ अदालत में अगर रिश्वत लेने के आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें 10 साल क़ैद तथा विश्वासघात के आरोप सही साबित होने पर 3 साल क़ैद की सज़ा हो सकती है।